शैतान तुम्हारे कान में बोलता है — Ebook

द्वारा Graphonauta

4.09

शैतान बोलता है। तुम्हें बहकाने के लिए नहीं, बल्कि आईना लौटाने के लिए। डर, अपराधबोध, इच्छा, आत्मवंचना: जो कुछ तुम उस पर थोपते हो, वह सब तुम्हारा है। उस आवाज़ द्वारा सुनाया गया जो तुमने खुद को न सुनने के लिए गढ़ी।

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शैतान तुम्हारे कान में बोलता है — Ebook

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महत्वपूर्ण
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Description

तुमसे कहा गया कि बुराई का एक नाम है, एक रूप है, एक पूँछ है। कि वह आज़ाद घूमती है, तुम्हें बहकाती है, तुम्हारे बाहर मौजूद है। लेकिन अगर शैतान बोलता, तो वह तुमसे नरक की बात नहीं करता। वह तुम्हें जकड़ने वाले डर की, तुम्हारे पीछे घिसटती अपराधबोध की, तुम्हारी नकारी हुई इच्छाओं की, हर सुबह तुम्हारी निखारी हुई आत्मवंचना की बात करता। वह तुम्हारी बात करता। और जो तुम कान में सुनते, वह तुम्हें ज़रा भी अच्छा नहीं लगता।