Description
तेल के एक बैरल में ग्यारह वर्षों का मानव श्रम समाहित है। अस्सी डॉलर। एक रात का खाना। बिना यूनियन, बिना नैतिकता, बिना संतान। उस दास पर सब कुछ बना: लोकतंत्र, अधिकार, मध्यम वर्ग, मुक्ति। वह प्रश्न जो कोई नहीं पूछता—जब वह कम उत्पादन दे तो क्या होगा? गायब होने पर नहीं। कम देने पर। जिसे हम प्रगति कहते हैं वह विजय नहीं है। वह एक बिल है। और उसे चुकाने का अधिशेष समाप्त हो रहा है।




