पुस्तक का परिचय
तेल के एक बैरल में ग्यारह वर्षों का मानव श्रम समाहित है। अस्सी डॉलर। एक रात का खाना। बिना यूनियन, बिना नैतिकता, बिना संतान। उस दास पर सब कुछ बना: लोकतंत्र, अधिकार, मध्यम वर्ग, मुक्ति। वह प्रश्न जो कोई नहीं पूछता—जब वह कम उत्पादन दे तो क्या होगा? गायब होने पर नहीं। कम देने पर। जिसे हम प्रगति कहते हैं वह विजय नहीं है। वह एक बिल है। और उसे चुकाने का अधिशेष समाप्त हो रहा है।
इस पुस्तक के विषय
तेल, ऊर्जा अधिशेष और प्रगति, अधिकारों तथा लोकतंत्र के भौतिक आधारों पर एक निबंध।
यह ईबुक कैसे पढ़ें
इस खरीद में भुगतान के दिन से 10 दिनों तक आपके Graphonauta खाते में इस हिंदी ईबुक का ऑनलाइन एक्सेस शामिल है। इसे ब्राउज़र में पढ़ें। इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक है; डाउनलोड करने योग्य फ़ाइलें शामिल नहीं हैं।
ईबुक और ऑडियोबुक अलग-अलग बेची जाती हैं। अपनी पसंद का प्रारूप चुनें।




